गाँवों में अक्सर किसान अपनी मेहनत से फसल उगाते हैं, लेकिन असली मुनाफा उन्हें नहीं बल्कि बिचौलियों और बड़े ब्रांड्स को मिलता है। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि किसान सिर्फ कच्चा माल बेचते हैं, जबकि शहरों में वही चीज़ पैकिंग, ब्रांडिंग और वैल्यू एडिशन (Value Addition) के बाद कई गुना दाम पर बिकती है। अगर गाँव में ही ऐसी यूनिट शुरू की जाए जहाँ हल्दी, मिर्च, आँवला जैसी फसलों को साफ़ कर, सुखा कर, पाउडर और अन्य प्रोडक्ट्स बनाकर ब्रांडेड पैकिंग में तैयार किया जाए, तो यह बिज़नेस किसानों को नया जीवन दे सकता है। इस ब्लॉग में हम इस बिजनेस आइडिया को डीटेल से जानेंगे।
क्या है यह बिज़नेस?
इस मॉडल में किसान या युवा गाँव में ही एक छोटी सी वैल्यू एडिशन यूनिट (Processing Unit) लगाते हैं। खेत से आई हल्दी की गांठ को धोकर, सुखाकर हल्दी पाउडर बनाया जाता है। लाल मिर्च को साफ़ करके चिली पाउडर में बदला जाता है। आँवले को सुखाकर आँवला पाउडर, कैंडी या जूस बनाया जा सकता है। फिर इन्हें छोटे-छोटे पैकेट्स और ब्रांडेड पैकेजिंग में शहर भेजा जाता है। इसमें आप गांव से सीधा कच्चा माल लेकर उसे साफ करके पैकेजिंग करके बेचते हैं।
शुरु कैसे करें?
सबसे पहले मार्केट रिसर्च करें और पता लगाएँ कि आपके क्षेत्र में कौन-सी फसल ज्यादा होती है और उसकी माँग शहरों में कैसी है। छोटे स्तर से शुरू करें और शुरुआत में 2-3 प्रोडक्ट्स पर ही फोकस करें, जैसे हल्दी पाउडर + मिर्च पाउडर। जरूरी मशीनें लगाएँ जैसे धुलाई और सुखाने की मशीन, ग्राइंडिंग मशीन (पाउडर बनाने के लिए), पैकेजिंग मशीन आदि। और साथ ही सरकारी योजनाओं का फायदा लें PM Formalisation of Micro Food Processing Enterprises (PMFME), MSME, NABARD जैसी योजनाओं से सब्सिडी और ट्रेनिंग मिल सकती है। इस तरह से आप इस बिजनेस की बेहतरीन शुरुआत कर सकते है।
कुछ बेस्ट यहां देखें Second hand products बेचकर पैसा कमाने का तरीका कमाएं 60000 रूपए महीना अभी सही समय है यह बिजनेस शुरू करने का,यहां देखें
कितनी लागत और कमाई?
लागत की बात करें तो एक बेसिक यूनिट को शुरू करने में 2 से 5 लाख रुपये लग सकते हैं (सरकारी मदद से यह कम भी हो सकता है)। अगर आप छोटे स्तर पर शुरू करते है तो ज्यादा इन्वेस्टमेंट की जरूरत नहीं होती है बस थोड़े से इन्वेस्टमेंट से ही शुरू हो सकता है।
और कमाई देखें तो अगर आप 1 किलो हल्दी 50 रुपये में खरीदते हैं और पाउडर बनाकर पैकिंग में 150–200 रुपये प्रति किलो बेचते हैं, तो मुनाफा साफ़ दिखता है। इसी तरह, मिर्च पाउडर और आँवला पाउडर की डिमांड और प्रॉफिट भी बहुत अच्छा है। एक छोटे यूनिट से हर महीने 40,000–1,00,000 रुपये तक की कमाई संभव है।
पैकेजिंग और ब्रांडिंग कैसे करें?
आज समय में पैकेजिंग, ब्रांडिंग और मार्केटिंग से ही सबकुछ बिकता है। लोग ब्रांडेड और साफ-सुथरे पैक्ड प्रोडक्ट्स को ही ज़्यादा पसंद करते हैं। आकर्षक नाम और लोगो बनाइए। और पैकेट्स पर “100% शुद्ध गाँव से सीधा” जैसी टैगलाइन लिखिए। केवल टैगलाइन ही नहीं रखनी उस प्रोडक्ट को भी शुद्ध बनाना है ताकि आप कस्टमर का भरोसा जीत सको। और सोशल मीडिया (Instagram, WhatsApp, Facebook) और ऑनलाइन मार्केटप्लेस (Amazon, Flipkart, BigBasket) पर भी प्रोडक्ट बेच सकते हैं।
बेचे कहां?
बेचने के लिए आपके पास बहुत सारे ओप्शन है जैसे
•शहर की किराना और जनरल स्टोर्स
•ऑर्गेनिक प्रोडक्ट शॉप्स
•ऑनलाइन प्लेटफॉर्म
•मेले और प्रदर्शनी (Exhibitions)
•डायरेक्ट कस्टमर मॉडल (WhatsApp/Facebook ग्रुप्स)
इन जगहों पर आप बेच सकते है और भी तरीके है जैसे बड़े बड़े मार्ट से सम्पर्क करके क्योंकि वहां आपके प्रोडक्ट की पहचान बनेगी लोग बार बार आपके प्रोडक्ट को खरीदेंगे।
निष्कर्ष
गाँवों में फसलों की Value Addition Unit लगाना सिर्फ बिज़नेस नहीं बल्कि एक सामाजिक क्रांति भी है। इससे किसान कच्चा माल बेचने के बजाय तैयार प्रोडक्ट बेचेंगे और शहरों की बड़ी कंपनियों को टक्कर दे पाएंगे। अगर सही रणनीति और ब्रांडिंग के साथ इसे शुरू किया जाए तो यह बिज़नेस लाखों की कमाई कराने के साथ-साथ गाँव के विकास का भी रास्ता खोल सकता है।